एक थे राम आधार भैया…

वह राम आधार भैया थे! स्कूल के गेट के ठीक सामने चुरमुरे का खोमचा लगाते थे।
छुट्टी होते ही लड़कियों का झुण्ड उनके खोमचे को चारों ओर से घेर लेता था… पच्चीस पैसे का एक चुरमुरा, जो बाद में पचास पैसे का हो गया था।

लाई, सेंव, प्याज़, धनिया पत्ती, मिर्च, नींबू जैसी चीज़ें मिलाकर चुरमुरा बनाते… खोमचे के एक कोने पर एक ही आकार के कटे हुए काग़ज़ करीने से दबे होते, बर्तन में चुरमुरा बनाकर एक-एक काग़ज़ उठाते, कोन बनाते, चुरमुरा उसमें भरते, ऊपर से एक्स्ट्रा मूँगफली के दाने डालते और एक साथ कम से कम चार-पाँच चुरमुरे के ऑर्डर पूरे करके दूसरे ऑर्डर पर लग जाते!

बात है छठीं से आठवीं तक की, स्कूल बस में हमारी सेकंड शिफ्ट होने के कारण कुछ दोस्तों के साथ मुझे भी रोज़ क़रीब चालीस-पचास मिनट स्कूल में ही इंतज़ार करना होता। इस इंतज़ार के दौरान हमलोग कुछ देर खेलकूद करते और कुछ देर बातें भी करते। गेट पर जब बाक़ी बच्चों की भीड़ कम हो जाती तो हमलोग भी लगभग रोज़ ही राम आधार भैया से चुरमुरा लेने पहुँचते।

मुश्किल से दो-ढाई फ़ीट के अपने खोमचे पर वह कितने सलीके से सबकुछ व्यवस्थित करके रखते थे… याद आता है तो बड़ी हैरानी होती है!

आधी जगह तो लाई ही घेर लेती थी, और बाक़ी की आधी जगह पर कुछ सेंव, मूँगफली जैसी सूखी सामग्री और खोमचे पर ही ठीक उनके सामने प्याज़, हरी मिर्च, हरी धनिया काटने के लिए लकड़ी का एक छोटा सा चॉपिंग बोर्ड!

आज बड़े-बड़े शेफ़ जिस चॉपिंग बोर्ड का इस्तेमाल बड़े ही कूल स्टाइल में करते हैं, राम आधार भैया तो उस ज़माने में ही बड़ी तत्परता से उसी का इस्तेमाल करते थे! (उनके जैसे और भी बहुत से होंगे)

खट-खट-खट-खट… कैसे तेज़ी से बारीक़ प्याज़ खटाखट काटते थे! एक आकार की… बिलकुल छोटी-छोटी, बिलकुल बच्चों के स्वाद के हिसाब से! नींबू डालने के लिए भी… ठीक से याद नहीं, शायद लकड़ी का लाइम स्क्वीज़र होता था!

हर चुरमुरे में हर चीज़ बराबर मात्रा में… बस, मिर्च फ़रमाइश के हिसाब से… मेरे जैसे लोगों के लिए बिना मिर्च का कोन, और बाक़ियों के लिए मिर्च वाला… फिर ऊपर से कुछ सेंव के साथ चार दाने मूँगफली के। जिसपर हममें से अधिकाँश की डिमांड पूरी करने के लिए ऊपर से दो-चार दाने मूँगफली और डाल देते!

मूँगफली के वे एक्स्ट्रा दाने शायद आज के काजू-बादाम से भी अधिक क़ीमती लगते थे!

बचपन की यादों के खज़ाने में एक पेज राम आधार भैया के नाम भी है…

Nostalgia? 😃😍

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