कुछ इस तरह…

ज़िन्दगी की बेदर्दी से जब कभी मन घबराए,
बेबसी चुपके से जब हौसलों पर हावी हो जाए,
कुछ न करो, कुछ न कहो, हौले से बस मुस्कुरा दो
यकीन मानो, उस मुस्कान में दर्द धीरे से पिघल जाएगा
निराशाओं के अंधियारे में आशा की लौ टिमटिमाएंगी,
ज़िन्दगी का हौसला फिर‌ से वापस आ जाएगा।

दर्द जब टीस बन दिल को छलनी कर जाए,
ज़िन्दगी की वीरानगी जब आंखों में उतर आए,
एक बार, कोशिश करके, जी भरकर खिलखिला दो
दर्द भी हैरान हो, कसमसाकर रह जाएगा
निराशाओं में आशा के दीप जगमगाएंगे,
ज़िन्दगी का हौसला बुलंद हो जाएगा।

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