खिलौने ले लो!

साप्ताहिक कहानियाँ – 04 – 30 मई, 2026

खिलौने ले लो, बच्चों के खिलौने। रंग-बिरंगे खिलौने। ऐसे मनभावन रंगों के खिलौने, जो बच्चों के ही नहीं माता-पिताओं की दिलों को लुभा लेते। सड़क किनारे फुटपाथ पर। लाल बत्ती से कुछ ही पहले। आते-जाते लोग थोड़ा रुककर एकाध खिलौने ले लेते। ऑफ़िस से लौटते कोई अंकल या कोई आंटी कभी अपने बच्चों के लिए, तो कभी किसी बच्चे को जन्मदिन का उपहार देने के लिए।

“ले जाओ साहब, घर में बच्चे खेलेंगे। बहुत सस्ते में मिल रहे हैं। आंटी जी, शोरूम में इन्हीं खिलौने के चार गुने दाम देने पड़ेंगे।”

अपनी उम्र के हिसाब से मार्केटिंग की उचित तकनीक अपनाती, ग्राहक के हृदय को छूने का प्रयास करती वो लड़की, जो अभी ख़ुद ही बच्ची है! जिसके लिए अभी ख़ुद ही खेलने-पढ़ने की उम्र है।

“अभी तो तुम ख़ुद छोटी हो, तुम्हारा मन नहीं करता खेलने-कूदने का? और यहाँ दुकान सजाए बैठी हो तो पढ़ाई कब करती हो?’ आंटी जी के हृदय में स्वाभाविक प्रश्न उत्पन्न हुए।

“पढ़ाई तो यहीं कर लेती हूँ, न! इतने ग्राहक नहीं होते आंटी जी, जो हर समय व्यस्त रखें। और शाम छोटे भाई बहन के साथ खेलती भी हूँ।’ कुछ मुस्कराकर, कुछ इतराकर बच्ची बोल पड़ी।

आंटी जी ने उसके निजी जीवन में रुचि ली, तो उसके हृदय में आस जगी। केवल एक आस, कि अब एकाध खिलौने तो बिक ही जाएँगे।

उधर, आंटी का हृदय नए प्रश्न में उलझ गया था। इस बच्ची को खेल के लिए खिलौने की आवश्यकता कहाँ? इसके साथ खेलने के लिए छोटे भाई-बहन हैं। शायद यह नहीं जानती कि जिसे वह भाई-बहन के साथ खेलना कह रही थी, वह दरअसल छोटे भाई-बहनों को सँभालना होता है, ताकि माँ घर के कामकाज निपटा सके!

और पढ़ाई? पढ़ाई तो तभी संभव है न, जब इन खिलौनों को बेचकर चार पैसे कमा सकेगी!

कुछ आवश्यकताओं को पूरी करने के लिए जीवन मूक आदेश दे देता है – स्वयं कमाओ, फिर जियो अपना जीवन।

इस आदेश में कोई भावना नहीं, न कोई क्रोध, न कोई आवेश। यह मात्र सत्य होता है। इस सत्य में केवल सत्य होता है, कोरा सत्य, पीड़ित सत्य।

फ़ोटो क्रेडिट – मनोज कुमार फ़ोटोग्राफ़र

इधर, आंटी जी के हृदय से बेखबर वो बच्ची बस खिलौने की बिक्री की आस में उसकी ओर देख रही थी। आंटी ने प्यार से बात की, तो एक-दो खिलौने भी ज़रूर ख़रीदेगी!

© गरिमा संजय

4 thoughts on “खिलौने ले लो!”

  1. दिल को छू गई। यथार्थ बयान करती कहानी।

  2. Heart touching and very sensitive story you tabled, it’s really tempting to read the whole story

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