जीवन अमलतास कर लें…

वो कहते हैं, नदियों को साफ़ मत करिए,

बस उन्हें गंदा मत कीजिए,

साफ़ तो वो ख़ुद ही ख़ुद को कर लेंगी.

(नदियों में शोधन की प्राकृतिक प्रक्रिया होती है। इसी विज्ञान की जानकारी के कारण हमने उसमें मलबा भी डालना शुरू कर दिया। बस, वही नहीं करना था।)

पर्वतों की संपदा बचाने को नए पर्वत नहीं बनाने हमको.

बस उन्हें खोदना बंद कीजिए,

अपनी अनमोल संपदा का ख़याल वो ख़ुद ही कर लेंगे।

 

आकाश के विस्तृत पटल पर कोई रंग भरने नहीं हमको

वो हम कर भी नहीं सकते!

आकाश के विस्तृत पटल पर कोई रंग भरने नहीं हमको

बस, हवा प्रदूषित न करें,

वो ख़ुद ही ख़ुद को रंग लेगा।

 

धरती से जल पाने को नए कुएँ नहीं खोदने हमको

बस मिट्टी को मिट्टी रहने दें

उन पर सीमेंट नहीं पोतें

उन पर प्लास्टिक न चढ़ाएँ

भूजल खुद ही ऊपर आ जाएगा।

 

गाय-बकरी, कुत्ते बिल्लियों के मुद्दे उठाकर

अमानुष यूँ भी मत बनिए,

उनकी अहमियत स्वीकारें, अपनी जान बचा लें

वो अपना ख़याल ख़ुद ही रख लेंगे!

उनकी जान छोड़िए, वो अपनी जान ख़ुद बचा लेंगे।

 

धरा पर वर्षा लाने को नए मेघ नहीं रचने हमको

वनीय संपदा सँभालें, थोड़े जंगलों को बचा लें,

धरती का संतुलन बना रहा

तो ये मेघ ख़ुद ही झूम-झूम बरसेंगे

धरती का संतुलन बचा लें

ये मेघ ख़ुद ही बरसेंगे

धरा पर वर्षा लाने को नए मेघ नहीं रचने हमको।

 

धरती पर रंग भरने को नए वनस्पति नहीं रचने हमको

कोई पुष्प, कोई पाती, कोई नए पौधे हमें नहीं बनाने!

धरती पर रंग भरने को नए वनस्पति नहीं रचने हमको

बस माटी प्रदूषित न करें,

वो ख़ुद ही ख़ुद को पल्लवित कर लेगी!

माटी को प्रदूषित न करें,

धरती ख़ुद ही ख़ुद को पल्लवित कर लेगी।

 

अपना जीवन बचाने को

भविष्य छोड़िये, वर्तमान बचाने को

धरती, आकाश, वायु और जल को संभालें

यह अग्नि सँभालें

जीवन अमलतास कर लें।

पंच-तत्त्वों का सम्मान कर

जीवन पुष्पित पल्लवित कर लें।

जीवन अमलतास कर लें।

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