तस्वीर

साप्ताहिक कहानी – 18 – 05 सितंबर, 2026

“कितनी ख़ूबसूरत हो! तुम्हें तो मॉडल बनना चाहिए! बस, जल्दी से एक अच्छी सी तस्वीर खिंचवाकर भेज दो। मेरे अंकल की ऐड एजेंसी है। देखना, कितनी जल्दी मॉडल बन जाओगी!”

उन्नीस वर्ष की विपाशा के कानों में श्यामल के शब्द रस की तरह घुल गए। ख़ुशी से झूमते मन को थोड़ा नियंत्रित किया, और श्यामल से पूछ बैठी, “मॉडलिंग? सचमुच?”

इस उम्र में मॉडलिंग का सपना अधिकतर लड़के-लड़कियों को लुभाता ही है! ग्लैमर की वह चमक-दमक किसे नहीं मोह लेती? विपाशा भी तो कोई अलग न थी!

बस, वह यह नहीं समझ पाती थी कि इस मनमोहक, भड़कीली दुनिया के पीछे ज़िंदगी कैसी है? माता-पिता की अनुमति मिलनी मुश्किल ही थी।

साथ ही मन में एक सवाल भी आता - यों तो, सभी आते हैं दुनिया में एक न एक दिन तस्वीर बन जाने के लिए... पर ऐसा तो नहीं कि एक तस्वीर खिंचवाने के बाद कहीं ज़िंदगी बस तस्वीर ही बनकर रह जाए?

तमाम सवालों को मन में दबाए बस अपने में ही रह गई। और, श्यामल का प्रस्ताव आया-गया हो गया।

चित्र - AI द्वारा निर्मित

लगभग तीस बरस बाद, दो बच्चों की माँ विपाशा के पास एक बार फिर मॉडलिंग का ऑफ़र आया है। उस विज्ञापन एजेंसी से, जहाँ अभी-अभी उसकी बेटी ने ज्वाइन किया है।

बेटी के बॉस ने पहली मुलाक़ात में ही विपाशा के सामने अपना प्रस्ताव रखा।

बेटी ख़ुशी से उछल पड़ी, बेटा अपनी माँ के व्यक्तित्त्व से और भी अधिक प्रभावित था और पति की आँखें प्रशंसा करते न थमतीं।

आज वह इस प्रस्ताव को वह आया-गया नहीं कर सकती थी। उसकी बेटी की नौकरी का सवाल था! उसके बॉस को मना करके नाराज़ कैसे कर सकती थी? पशोपेश में चुप रह गई।

बस, विचार में गुँथ गई - यह श्यामल अब क्या चाहता है?

अपनी नियति समझ नहीं पा रही थी... उसकी नीयत नहीं समझ पा रही थी।

तस्वीर बनने के जिस प्रस्ताव को उसने तीस बरस पहले ठुकरा दिया था, ज़िंदगी फिर से उसी प्रस्ताव को लिए उसके सामने खड़ी थी... और, जीवन के अजब चक्र को वह चुपचाप, हैरानी से देख रही थी।

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