उसकी आँखों में सपनीली सी चमक थी। सखी-सहेलियों के साथ लोहड़ी की धूम मचाकर घर वापस आई थी। घर लौटते…
यादें पुराने कागज़ातों के बीच किसी पुरानी किताब के अंदर हमेशा कोई नोट नहीं मिलते हर बार सूखे फूल…
सोलहवाँ जन्मदिन आज स्वाति बहुत खुश थी… उसका सोलहवाँ जन्मदिन जो था! कुछ ख़ास हो या न हो, फिर…
एक था बंटी बचपन की कुछ यादें शरारतों के पुलिंदों में बंधी मिलती हैं। ऐसी ही एक याद है उस…
मिट्टी के खिलौने छोटी थी, बहुत छोटी… और अपने छोटे-छोटे दोस्तों के साथ खेलते-कूदते चली जाती थी घर से…
