चुनावी प्रेम

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सुना है, कल रोज़ डे पर गुलाब की जगह कमल बांटे गए
सुना है, आजकल प्रेम का रंग भी लाल-गुलाबी न होकर भगवा हो चला है।

वे भी जो राम का अस्तित्व ही नकारते थे,
इतिहास के पन्नों से राम का नाम मिटाकर,
वे जो राम सेतु का सौदा करने चले थे,
सुना है, आज वे भी राम मंदिर बनवाने का दावा करने लगे हैं।

वे जो बताते थे कि मंदिर जाने वाले लड़कियां छेड़ने जाते हैं,
सुना है, आजकल वे भी भगवा धारण कर,
माथे पर तिलक लगा, मंदिर जाने लगे हैं।

सुना है, ये वाला प्रेम भी बड़ा मौका परस्त होता है
जो ताकतवर हो, उसी की बांहों के लिए बेचैन हो तड़प उठता है!
सुना है, इसी को चुनावी इश्क़ कहते हैं?